देहरादून के माता वाला बाग को अतिक्रमण से बचाने के लिए सैकड़ों स्थानीय नागरिकों ने 13 अप्रैल को पैदल मार्च निकाला। संघर्ष समिति ने ऐतिहासिक स्थल की सुरक्षा और पेड़ों की कटाई रोकने की मांग को लेकर प्रशासन को चेतावनी दी।
देहरादून के ऐतिहासिक माता वाला बाग को अवैध कब्ज़ों और पेड़ों की कटाई से बचाने के लिए माता वाला बाग अखाड़ा मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने 13 अप्रैल को जन आक्रोश पैदल मार्च का आयोजन किया। यह मार्च शिवाजी धर्मशाला से शुरू होकर दरबार साहब झंडा बाजार तक पहुंचा, जहां स्थानीय नेताओं ने प्रशासन को 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की चेतावनी दी।
प्रमुख मांगें:
- बाग की 150 साल पुरानी ऐतिहासिक दीवारों की मरम्मत
- हरे पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रतिबंध
- अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
माता वाला बाग का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
“माता वाला बाग एक ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है, जो 19वीं सदी में स्थापित हुआ था और यहां 100 से अधिक प्राचीन पेड़ पाए जाते हैं।”
स्थानीय प्रतिक्रिया: “यह हमारी विरासत है”
समिति के संयोजक गोपाल कृष्ण ने बताया कि पिछले 5 सालों से बाग की 2 एकड़ भूमि पर अवैध निर्माण हो रहा है, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। स्थानीय निवासी अमन स्वीडिया ने कहा, “यह बाग न सिर्फ हमारी धरोहर है, बल्कि शहर के पर्यावरण संतुलन के लिए भी ज़रूरी है।”
समिति ने अगले सप्ताह तक प्रशासन से जवाब न मिलने पर धरना-प्रदर्शन का एलान किया है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे इस आंदोलन से जुड़कर शहर की विरासत बचाने में सहयोग दें।